कच्चा तेल सस्ता, फिर भी महंगा पेट्रोल-डीजल: जानें वजह

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने के बावजूद, भारतीय उपभोक्ताओं को राहत मिलने का कोई संकेत नहीं दिख रहा है। हाल ही में रिपोर्ट्स में बताया गया है कि जबकि क्रूड ऑयल की कीमतों में 5% से अधिक की तेज गिरावट दर्ज हुई है, पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी की संभावनाएं बनाई जा रही हैं। यहाँ तक कि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ दिनों में हुई 7 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी भी 'कम' मानी जा रही है। यह विरोधाभासी स्थिति आम नागरिकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि यदि कच्चा तेल सस्ता हो रहा है, तो खुराफात (retail) स्तर पर कीमतें क्यों नहीं घट रही या फिर बढ़ ही क्यों रही हैं? जवाब तेल कंपनियों के 'गणित' और सरकारी नीतियों में छिपा है। आइए, इस जटिल स्थिति को समझते हैं।

तेल कंपनियों का 'गणित': अंडर-रिकवरी का बोझ

तेल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) जैसे Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum, और Hindustan Petroleum लगातार अपनी वित्तीय स्थिति को ठीक करने की कोशिश में रहती हैं। पिछले कुछ महीनों में, जब कच्चे तेल की कीमतें बहुत ऊंची थीं, इन कंपनियों ने अपने नुकसान को कम करने के लिए कीमतों में भारी बढ़ोतरी की थी। अब, जब कच्चा तेल सस्ता हो रहा है, तो ये कंपनियां उस समय के 'अंडर-रिकवरी' (under-recovery) को पूरा करना चाहती हैं।

सरकार द्वारा लगाए गए उत्पाद शुल्क (excise duty) और वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) की वजह से तेल कंपनियों के पास कीमत निर्धारण में लचीलापन कम होता जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले 10-11 दिनों में ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में चौथी बार बढ़ोतरी की गई है, जिससे कुल मिलाकर 7 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा की वृद्धि हुई है। यह स्पष्ट करता है कि कंपनियां मौजूदा मुनाफे की बजाय, पिछले नुकसान की भरपाई पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ: 2022 से स्थिर कीमतें?

कुछ रिपोर्ट्स, विशेष रूप से टीवी9 हिंदी की एक रिपोर्ट में, दावा किया गया है कि 22 मई 2022 के बाद से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं देखा गया है। उस दिन सरकार ने पेट्रोल पर 8 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 6 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क में कटौती की थी। हालांकि, यह जानकारी वर्तमान वास्तविकता से मेल नहीं खाती, क्योंकि पिछले कई वर्षों में कीमतों में निरंतर उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। यह भ्रम शायद किसी विशिष्ट अवधि या स्थानीय स्तर की स्थिरता को लेकर हो सकता है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कीमतें नियमित रूप से बदलती रहती हैं।

व्यावहारिक रूप से, हर सुबह 6 बजे कीमतों में संशोधन होता है। इसलिए, 'स्थिर कीमतों' का दावा वर्तमान बाजार की स्थिति को ध्यान में रखते हुए गलत प्रतीत होता है। वास्तविकता यह है कि उपभोक्ताओं को लगातार बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है।

मुख्य शहरों में पेट्रोल-डीजल की वर्तमान कीमतें

देश के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें काफी भिन्न हैं, जो मुख्य रूप से राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले VAT पर निर्भर करती हैं। हाल की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ प्रमुख शहरों में कीमतें इस प्रकार हैं:

  • नई दिल्ली: पेट्रोल ₹96.72/लीटर, डीजल ₹89.62/लीटर
  • मुंबई: पेट्रोल ₹106.31/लीटर, डीजल ₹94.27/लीटर
  • कोलकाता: पेट्रोल ₹106.03/लीटर, डीजल ₹92.76/लीटर
  • चेन्नई: पेट्रोल ₹102.86/लीटर, डीजल ₹94.46/लीटर
  • बेंगलुरु: पेट्रोल ₹101.94/लीटर, डीजल ₹87.89/लीटर
  • गुरुग्राम: पेट्रोल ₹96.92/लीटर, डीजल ₹89.79/लीटर
  • लखनऊ: पेट्रोल ₹96.54/लीटर, डीजल ₹89.63/लीटर

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में ईंधन सबसे महंगा है, जबकि लखनऊ और बेंगलुरु में तुलनात्मक रूप से सस्ता है।

विशेषज्ञों की राय और भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड और WTI क्रूड की कीमतों में 12 अप्रैल के बाद से 7% से अधिक की गिरावट आई है। इसके बावजूद, घरेलू बाजार में राहत न मिलने का कारण 'करों का बोझ' है। भारत में ईंधन पर लगने वाले करों का हिस्सा कीमत का लगभग 50-60% तक हो सकता है। इसलिए, कच्चे तेल में होने वाली छोटी सी गिरावट को करों के माध्यम से सोaks (absorb) कर लिया जाता है, जबकि बढ़ोतरी सीधे उपभोक्ताओं पर थोपी जाती है।

भविष्य में, यदि कच्चे तेल की कीमतें और गिरती हैं, तो सरकार को राजस्व की कमी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे वह करों में कटौती की ओर मुड़ सकती है। हालांकि, तेल कंपनियां अभी भी अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेंगी, जिससे कीमतों में अस्थिरता बनी रहेगी।

Frequently Asked Questions

कच्चा तेल सस्ता होने पर भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें क्यों नहीं घट रही?

इसका मुख्य कारण तेल कंपनियों द्वारा पिछले समय में हुआ 'अंडर-रिकवरी' (नुकसान) की भरपाई करना है। साथ ही, भारत में ईंधन पर लगने वाले भारी करों (उत्पाद शुल्क और VAT) की वजह से कच्चे तेल में हुई गिरावट का लाभ सीधे उपभोक्ता तक नहीं पहुंच पाता। कंपनियां पहले अपना नुकसान पूरा करती हैं, फिर कीमतों में कमी लाती हैं।

पिछले 10 दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई?

हाल की रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले 10-11 दिनों में तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चौथी बार बढ़ोतरी की है। इस दौरान कुल मिलाकर 7 रुपये प्रति लीटर से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसे कुछ विश्लेषकों ने 'पर्याप्त नहीं' कहा है।

22 मई 2022 को सरकार ने क्या कदम उठाया था?

22 मई 2022 को केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर 8 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 6 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क (excise duty) में कटौती की थी। इसका उद्देश्य महंगाई को नियंत्रित करना और उपभोक्ताओं को राहत देना था, हालांकि इसके बाद कीमतों में स्थिरता बनाए रखने का दावा कुछ रिपोर्ट्स में किया गया है।

किस शहर में पेट्रोल और डीजल सबसे महंगा है?

हाल की जानकारी के अनुसार, मुंबई और कोलकाता में पेट्रोल की कीमत 106 रुपये प्रति लीटर से अधिक है, जो इसे देश के सबसे महंगे शहरों में शामिल करता है। इसका मुख्य कारण इन राज्यों द्वारा लगाया गया उच्च वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) है।

भविष्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतें और बढ़ सकती हैं?

हां, संभावना बना है। तेल कंपनियां अभी भी अपनी वित्तीय स्थिति को सुधारने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं या बढ़ती हैं, तो घरेलू कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना है। वहीं, यदि कच्चा तेल और सस्ता होता है, तो भी करों की वजह से राहत तुरंत नहीं मिल सकती।

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